केवल दो वर्षों में अंतरिक्ष स्टार्टअप्स में 200 गुना वृद्धि
- केवल दो वर्षों में अंतरिक्ष स्टार्टअप्स में लगभग 200 गुना वृद्धि हुई है,
- मंत्री ने कहा कि यह बड़ी उपलब्धि प्रधानमंत्री द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने तथा बड़े पैमाने पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी की अनुमति देने के लिए लिए गए प्रमुख नीतिगत निर्णय के कारण संभव हो पाई है।
मुख्य बिंदु:
- अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या वर्ष 2022 में 1 से बढ़कर वर्ष 2024 में लगभग 200 हो गई है, जो इन वर्षों में 200 गुना की अभूतपूर्व वृद्धि है।
- अकेले वर्ष 2023 में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में लगभग 1000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
- इसके अलावा, यह उद्योग अमृत काल के दौरान प्रधानमंत्री के "सबका प्रयास" के विजन की पुष्टि करते हुए लगभग 450 MSME को सेवाएं प्रदान करता है।
- वर्ष 2030 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी वर्ष 2021 की तुलना में 4 गुना बढ़ जाएगी।
- वर्ष 2021 में भारतीय अंतरिक्ष उद्योग ने वैश्विक हिस्सेदारी में 2% का योगदान दिया। वर्ष 2030 तक इसके 8% और वर्ष 2047 तक 15% तक बढ़ने की उम्मीद है।
- वर्तमान में भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में 100% FDI की अनुमति देता है, जिससे इस क्षेत्र में नवाचार और विकास के नए क्षितिज खुलते हैं।
- निजी क्षेत्र उन्नत लघु उपग्रहों, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकियों, कक्षीय स्थानांतरण वाहनों आदि के विकास के लिए नए समाधान प्रस्तुत कर सकता है।
- इसरो द्वारा निजी खिलाड़ियों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) के बारे में। अब तक, 403 ऐसे हस्तांतरण हुए हैं और वर्ष 2023 तक NSIL/INSPACE द्वारा अतिरिक्त 50 हस्तांतरण किए जाएंगे।
- इसरो की अगले 100 दिनों की योजनाओं और उसके निर्धारित प्रक्षेपणों में निसार कार्यक्रम भी शामिल है जो नासा और इसरो के बीच एक संयुक्त पृथ्वी-अवलोकन मिशन है।
- सूची में अन्य कार्यक्रमों में जीसैट-20, पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान का लैंडिंग अभ्यास, अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग आदि शामिल हैं।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र के अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र की भूमिका को भी स्वीकार किया।
प्रीलिम्स टेकअवे
- इसरो
- NSIL

