| कार्यक्रम | 71वां अखिल भारतीय सहकारिता सप्ताह |
| तिथियां | 14 से 20 नवंबर 2024 |
| विषय | “विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता की भूमिका” |
| आयोजक | राष्ट्रीय सहकारी संघ (NCUI) |
| ऐतिहासिक संदर्भ | 1953 से प्रतिवर्ष मनाया जाता है |
| महत्व | सहकारिता के आर्थिक और सामाजिक विकास, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में योगदान को मान्यता |
| भारत का सहकारिता आंदोलन | विश्व का सबसे बड़ा सहकारिता आंदोलन |
| भारत में सहकारिता का विकास | - 1903: पहली ऋण सहकारी समिति स्थापित |
| - 1904: सहकारी ऋण समिति अधिनियम पारित |
| - 1919: सहकारिता राज्य का विषय बनी |
| - 1962: सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को सहकारी समितियों का संरक्षक बनाया गया |
| ग्रामीण विकास में भूमिका | कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, वस्त्र, आवास और ग्रामीण ऋण में महत्वपूर्ण योगदान |
| प्रमुख प्रभाव क्षेत्र | - कृषि सहकारी समितियां: कुल कृषि ऋण का 36%, 40% गन्ना खरीद, 45% चीनी उत्पादन |
| - डेयरी क्षेत्र: विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक, प्रति वर्ष 220 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक दूध उत्पादन |
| प्रमुख सफलता की कहानियां | - इफ्को: विश्व की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी समिति, 5.5 करोड़ किसानों तक पहुंच |
| - अमूल: भारत की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी समिति, ₹38,542 करोड़ का वार्षिक टर्नओवर |
| - SOFA: जैविक खेती को बढ़ावा देती है और आदिवासी किसानों को सशक्त बनाती है |
| - केरल दीनेश बीड़ी कर्मचारी सहकारी समिति: कर्मचारियों की मजदूरी और कार्य स्थितियों में सुधार |
| - KMF: कर्नाटक में 22.5 लाख दूध उत्पादकों का समर्थन करती है |
| सहकारिता का भविष्य | - तकनीकी एकीकरण और आधुनिकीकरण |
| - नाबार्ड और RBI द्वारा वित्तीय समर्थन जारी |
| - ग्रामीण आबादी को सहकारिता मॉडल के बारे में शिक्षित करना |