अमित शाह ने जम्मू, कश्मीर और लद्दाख की भू-सांस्कृतिक एकता पर पुस्तक जारी की
| सारांश/स्थिर | विवरण |
|---|---|
| खबर में क्यों? | जम्मू कश्मीर और लद्दाख के इतिहास पर किताब जम्मू कश्मीर एंड लद्दाख थ्रू द एजेस का अमित शाह ने विमोचन किया |
| घटना | किताब जम्मू कश्मीर एंड लद्दाख थ्रू द एजेस: ए विजुअल नैरेटिव ऑफ कॉन्टिन्युटीज एंड लिंकेजेस का विमोचन |
| विमोचन किसके द्वारा? | केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री, श्री अमित शाह |
| मौजूदा गणमान्य व्यक्ति | केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, आईसीएचआर के अध्यक्ष प्रो. रघुवेंद्र तंवर |
| प्रकाशक | राष्ट्रीय पुस्तक न्यास |
| किताब का फोकस | भारत की भौगोलिक-सांस्कृतिक एकता को दर्शाती है, अलगाव के मिथकों का खंडन करती है, और कश्मीर के 8,000 साल के इतिहास को उजागर करती है |
| मुख्य विषय | - जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व - कश्मीर का 8,000 साल से अधिक का ऐतिहासिक योगदान |
| विरासत और दस्तावेज़ीकरण | - लद्दाख और द्रास से मूर्तियाँ, स्तूप और मंदिरों के अवशेषों का वर्णन - राजतरंगिनी से संस्कृत संदर्भ |
| कश्मीर की सांस्कृतिक भूमिका | बौद्ध धर्म, सूफ़ीवाद, शैववाद और विभिन्न धर्मों को सदियों तक पोषित किया |
| धारा 370 का निरसन | - 5 अगस्त 2019 को धारा 370 के निरसन के लिए पीएम मोदी को श्रेय - धारा 370 को अलगाववाद और आतंकवाद की जड़ माना गया |
| श्री अमित शाह के मुख्य बयान | - कश्मीर भारत का अविभाज्य हिस्सा है। - धारा 370 आतंकवाद का प्रेरक था। - पीएम मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक और भाषाई विरासत अब सुरक्षित है। |

