बीसी सखी: उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वित्तीय लेनदेन | उत्तर प्रदेश में बीसी सखियों द्वारा पिछले 4.5 वर्षों में 27,000 करोड़ रुपये के लेनदेन सुगम बनाए गए। |
| महिला सशक्तिकरण | बीसी सखियां स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की ग्रामीण महिलाएं हैं जो बिना बैंक वाले क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं प्रदान करती हैं। |
| आय | बीसी सखियों ने कमीशन के रूप में 75 करोड़ रुपये कमाए। |
| राष्ट्रीय नेतृत्व | उत्तर प्रदेश अग्रणी है, इसके बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान हैं। |
| शुरुआत और पैमाना | यह पहल मई 2020 में शुरू की गई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश में लगभग 40,000 बीसी सखियां हैं। |
| बैंक साझेदारी | बीसी सखियां वित्तीय सेवाओं के लिए एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ साझेदारी करती हैं। |
| सशक्तिकरण पर ध्यान | पूर्व सैनिकों, बैंकरों और शिक्षकों के परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। |
| एनपीए पर प्रभाव | इस पहल के कारण महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) में कम एनपीए हैं। |
| एसएचजी क्रेडिट एक्सेस | 2013-14 के बाद से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने 6.96 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच प्राप्त की है। |
| भविष्य के लक्ष्य | लखपति दीदी योजना के तहत सभी ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों को नियुक्त करने का लक्ष्य है। |

