| घटना/मुख्य आकर्षण | हाल ही में भारत-पाकिस्तान में तनाव (10 मई) के कारण ब्रह्मोस मिसाइल चर्चा में। |
| विकसित किया गया | भारत के DRDO और रूस के NPO Mashinostroyeniya के बीच संयुक्त परियोजना। |
| नाम का मूल | नदियों ब्रह्मपुत्र (भारत) और मोस्कवा (रूस) से लिया गया। |
| पहली तैनाती | भारतीय नौसेना (2005) → भारतीय सेना (2007) → भारतीय वायु सेना (2019)। |
| प्रकार | सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल। |
| लंबाई | लगभग 8.2 मीटर (संस्करण के अनुसार अलग-अलग)। |
| गति | Mach 2.8 से Mach 3.5 (ध्वनि की गति से 3 गुना)। |
| रेंज | प्रारंभिक: 290 किलोमीटर; विस्तारित: 500-800 किलोमीटर; भविष्य: 1,500 किलोमीटर तक। |
| मार्गदर्शन प्रणाली | जड़त्वीय नेविगेशन + सैटेलाइट नेविगेशन + टर्मिनल मार्गदर्शन के लिए सक्रिय रडार होमिंग । |
| वारहेड | 200-300 किलो पारंपरिक वारहेड (उच्च विस्फोटक या अर्ध-कवच-भेदी)। |
| लागत | परियोजना लागत: $250 मिलियन (₹2,135 करोड़); फैक्ट्री सेटअप: ₹300 करोड़; प्रति मिसाइल: ₹34 करोड़। |
| नोदन | दो-चरण प्रणाली: ठोस रॉकेट बूस्टर + तरल-ईंधन वाला रैमजेट सस्टेनर। |
| वैरिएंट | ब्रह्मोस ब्लॉक I (290 किलोमीटर), ब्रह्मोस-ए (500 किलोमीटर), विस्तारित रेंज (450-500 किलोमीटर), ब्रह्मोस- II (हाइपरसोनिक, Mach 8, 1,500 किलोमीटर), ब्रह्मोस-एनजी (अगली पीढ़ी)। |
| विशेष सुविधाएँ | मल्टी-प्लेटफॉर्म लॉन्च (भूमि, समुद्र, वायु, पनडुब्बी), कम रडार सिग्नेचर, स्वायत्त संचालन, परिवर्तनीय उड़ान पथ (खड़ी गोताखोरी, समुद्र-स्किमिंग)। |
| परिचालन तैनाती | भारतीय नौसेना (जहाज से प्रक्षेपित), भारतीय सेना (मोबाइल लांचर), भारतीय वायु सेना (Su-30MKI), पनडुब्बी से प्रक्षेपित। |
| भविष्य के विकास | ब्रह्मोस- II: हाइपरसोनिक (Mach 8+), ब्रह्मोस-एनजी: बेहतर स्टील्थ और रडार, लंबी रेंज (1,500 किलोमीटर तक)। |