2024 राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: भारत की हथकरघा विरासत को श्रद्धांजलि
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| कार्यक्रम | 10वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस |
| तिथि | 7 अगस्त, 2024 |
| स्थापना | 2015 से प्रतिवर्ष मनाया जाता है |
| ऐतिहासिक महत्व | 7 अगस्त, 1905 को कोलकाता में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत का प्रतीक |
| 2024 की थीम | हथकरघा बुनाई में प्रौद्योगिकी और नवाचार का समन्वय |
| आयोजक | हथकरघा आयुक्त कार्यालय, नई दिल्ली |
| मुख्य आयोजन स्थल | नई दिल्ली |
| उत्सव की अवधि | एक सप्ताह तक |
| मुख्य गतिविधियाँ | - प्रदर्शनियाँ<br>- सोशल मीडिया अभियान<br>- लघु फिल्में और वृत्तचित्र |
| जमीनी स्तर पर जुड़ाव | भारत के 75 हथकरघा क्लस्टरों में कार्यक्रम |
| आर्थिक प्रभाव | - कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता<br>- 35.22 लाख हथकरघा कारीगर (2019-20)<br>- 72% महिला कार्यबल (25.46 लाख महिला कलाकार)<br>- औद्योगिक उत्पादन में 14% और जीडीपी में 4% का योगदान<br>- निर्यात: $1802.36 मिलियन (2023-24) |
| सांस्कृतिक महत्व | - विविध क्षेत्रीय पहचान को दर्शाता है<br>- पारंपरिक तकनीक और डिजाइन को संरक्षित करता है<br>- प्रतिष्ठित उत्पाद: बनारसी सिल्क साड़ी, पश्मीना शॉल |
| सरकारी पहल | - MyGov पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से डिजिटल प्रचार<br>- बुनकरों की आय बढ़ाने, कौशल विकास और बाजार पहुंच पर ध्यान |

