केंद्र सरकार भारत में रोजगार रिपोर्ट के खिलाफ ILO में जा सकती है
- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का संस्थापक सदस्य भारत, मार्च में जारी की गई भारत रोजगार रिपोर्ट, 2024 को लेकर संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है।
- केंद्रीय श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि ILO ने भारत में रोजगार परिदृश्य का आकलन करने के लिए जिस ‘मॉडल’ का इस्तेमाल किया था, वह उपयुक्त नहीं था और भारत की स्थिति के बारे में अपनी स्वयं की आकलन नीति है।
मुख्य बिंदु:
- लोकसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले, ILO और मानव विकास संस्थान (IHD) द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के बेरोजगार कार्यबल में लगभग 83% युवा हैं और कुल बेरोजगार युवाओं में माध्यमिक या उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं की हिस्सेदारी वर्ष 2000 में 35.2% से लगभग दोगुनी होकर वर्ष 2022 में 65.7% हो गई है।
- वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि ILO द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा देश में इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा से अलग हैं।
- उन्होंने कहा, "हम इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के समक्ष उठाएंगे।" उन्होंने कहा कि देश में रोजगार की अवधारणा में भारी बदलाव आ रहा है, क्योंकि अधिकाधिक लोग उद्यमी बन रहे हैं तथा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन और कर्मचारी राज्य बीमा निगम में अंशदान बढ़ने के साथ औपचारिक रोजगार में भी तेजी आ रही है।
- केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने पहले सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) जैसी निजी एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर संदेह व्यक्त किया था। सरकार इस बात पर जोर देती रही है कि आवधिक श्रम बल सर्वेक्षणों में भारत की स्थिति के बारे में बेहतर आंकड़े हैं।
- "रोजगार सृजन के साथ-साथ रोजगार क्षमता में सुधार करना सरकार की प्राथमिकता है। तदनुसार, भारत सरकार ने देश में रोजगार सृजन के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं।"
प्रीलिम्स टेकअवे:
- ILO
- NSSO

