कश्मीर के चिनार वृक्षों को बचाने की पहल
| सारांश/स्थैतिक | विवरण |
|---|---|
| समाचार में क्यों? | जियो-टैगिंग ने कश्मीर के प्रतिष्ठित चिनार पेड़ों को बचाया |
| पहल का नाम | डिजिटल ट्री आधार |
| उद्देश्य | अद्वितीय जियो-टैग्ड आईडी का उपयोग करके चिनार पेड़ों की निगरानी और संरक्षण |
| प्रयुक्त प्रौद्योगिकी | जीआईएस, क्यूआर कोड, धातु बारकोड कार्ड |
| टैग किए गए चिनार (अब तक) | 28,560 |
| सबसे पुराना चिनार | 700 साल पुराना (बुडगाम जिला) |
| सबसे बड़ा चिनार | 74-फीट व्यास (गांदरबल जिला) |
| महत्व | सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता संरक्षण, कार्बन अवशोषण, पर्यटन |
| खतरे | शहरीकरण, हाईवे विस्तार, अवैध कटाई |
| भविष्य के लक्ष्य | चिनार एटलस का निर्माण, चिनारों को चिनाब और पीर पंजाल घाटियों में शामिल करना |
| ऐतिहासिक विरासत | मध्य एशियाई उपदेशकों द्वारा परिचित; मुग़ल बाग़ानों और बॉलीवुड फिल्मों में प्रदर्शित |

