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पंचायत विकास: शक्तियों का हस्तांतरण

पंचायत विकास: शक्तियों का हस्तांतरण
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पंचायत विकास: शक्तियों का हस्तांतरण

विषयविवरण
चर्चा में क्यों?पंचायती राज राज्य मंत्री, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने नई दिल्ली में राज्यों में पंचायतों को हस्तांतरण की स्थिति - एक संकेतक साक्ष्य-आधारित रैंकिंग रिपोर्ट जारी की। यह रिपोर्ट पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को शक्तियों, कार्यों और वित्तीय हस्तांतरण की सीमा का मूल्यांंकन करती है।
हस्तांतरण में वृद्धि- कुल हस्तांतरण सूचकांक 39.9% (2013-14) से बढ़कर 43.9% (2021-22) हो गया।<br> - राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) 2018 के बाद से वृद्धि हुई।<br> - कार्यकर्ता सूचकांक में सुधार हुआ, जो बेहतर कार्यबल और बुनियादी ढांचे को दर्शाता है।
पंचायत हस्तांतरण सूचकांक में शीर्ष 10 राज्य1. कर्नाटक<br>2. केरल<br>3. तमिलनाडु<br>4. महाराष्ट्र<br>5. उत्तर प्रदेश<br>6. गुजरात<br>7. त्रिपुरा<br>8. राजस्थान<br>9. पश्चिम बंगाल<br>10. छत्तीसगढ़
आयामी विश्लेषण (प्रत्येक श्रेणी में अग्रणी)- केरल<br> - तमिलनाडु<br> - कर्नाटक<br> - गुजरात<br> - तेलंगाना<br> - कर्नाटक
सफलता की कहानियाँ- उत्तर प्रदेश ने पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी पहलों के कारण अपनी रैंकिंग में सुधार किया।<br> - त्रिपुरा ने राजस्व उत्पादन और वित्तीय प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
पीआरआई को मजबूत करने का महत्व- 73वें संविधान संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया।<br> - पीआरआई को ग्रामीण विकास केंद्र के रूप में कार्य करना चाहिए, जो निम्नलिखित सेवाएं प्रदान करे:<br>* पेंशन, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र।<br>* कल्याण योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत योजना) में पंजीकरण।<br>* विवाद समाधान और समुदाय विकास।
वित्तीय जवाबदेही उपाय- भ्रष्टाचार रोकने के लिए धन का निगरानी।<br> - लक्षित विकास के लिए धन का पारदर्शी उपयोग।<br> - नियमित लेखा परीक्षा और जवाबदेही तंत्र।
पीआरआई को मजबूत करने की सरकार की दृष्टि- विकसित भारत में पंचायतों की भूमिका: सतत विकास के लिए ग्रामीण स्वशासन।<br> - डिजिटल परिवर्तन: बेहतर बुनियादी ढांचा, पारदर्शी लेखा परीक्षा और समावेशी शासन।<br> - प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि के तहत विकेंद्रीकरण और ग्रामीण सशक्तिकरण पर ध्यान।

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