शहरी विस्तार से दिल्ली में बाढ़ का खतरा कैसे बढ़ रहा है
- अनियंत्रित और बिना सोचे-समझे किया गया शहरी विस्तार दिल्ली और बड़े राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लगातार शहरी बाढ़ का मुख्य कारण है।
मुख्य बिंदु
- जल-जमाव के कारण लम्बे समय तक बिजली गुल रही, संपत्ति को नुकसान पहुंचा और जान-माल का नुकसान हुआ, तथा कम से कम 11 लोगों की मौत संरचनाओं के ढहने और बिजली के झटके लगने के कारण हुई।
- नगर निगम अधिकारियों द्वारा नालों की अपर्याप्त सफाई जैसे कारक भी इसमें भूमिका निभाते हैं, लेकिन मूल रूप से दिल्ली एक अधिक बुनियादी समस्या से ग्रस्त है।
तेजी से बढ़ता शहर
- दिल्ली दुनिया के सबसे तेज़ शहरी विस्तार में से एक से गुज़र रही है। नासा की अर्थ ऑब्ज़र्वेटरी के डेटा के अनुसार, वर्ष 1991 से वर्ष 2011 तक दिल्ली का भौगोलिक आकार लगभग दोगुना हो गया है।
- संयुक्त राष्ट्र की वर्ष 2018 में विश्व के शहरों की डेटा पुस्तिका के अनुसार,वर्ष 2030 तक दिल्ली, टोक्यो को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर बन जाएगा, जिसकी अनुमानित जनसंख्या लगभग 39 मिलियन होगी, जो वर्ष 2000 की जनसंख्या से लगभग ढाई गुना अधिक है।
हर जगह कंक्रीट
- वास्तुकार और शहरी डिजाइनर केटी रविंद्रन ने बताया, "भूमि की ढलान रिज से नदी तक है यह लगभग 100 मीटर की खाई है।"
- दिल्ली के बाढ़ के मैदानों में निर्माण कार्य वर्ष 1900 के दशक में ही शुरू हो गया था, जब अंग्रेजों ने नदी के किनारे रेलवे लाइन बिछाने का निर्णय लिया था।
- इस कंक्रीटीकरण के कारण वर्षा जल को मिट्टी में रिसने के लिए बहुत कम जगह बचती है, जिससे बाढ़ आ जाती है।
कोई 'जल मास्टरप्लान' नहीं
- बाढ़ को नियंत्रित करने में मदद करने वाले जल निकायों को भी व्यवस्थित रूप से नष्ट कर दिया गया है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, दिल्ली में लगभग 1,000 जल निकाय हैं।

