भारत में रूफटॉप सौर ऊर्जा योजना का कितना उपयोग हो रहा है?
- भारत की स्थापित रूफटॉप सोलर (RTS) क्षमता में वर्ष 2023-2024 में 2.99 गीगावाट की वृद्धि हुई, जो एक साल में सबसे अधिक वृद्धि है।
- नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 31 मार्च तक भारत में कुल स्थापित RTS क्षमता 11.87 गीगावाट थी।
RTS कार्यक्रम
- भारत ने जनवरी 2010 में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन का शुभारंभ किया।
- इसका मुख्य उद्देश्य तीन चरणों में 20 गीगावाट सौर ऊर्जा (RTS सहित) का उत्पादन करना था
- वर्ष 2015 में सरकार ने इस लक्ष्य को संशोधित कर वर्ष 2022 तक 100 गीगावाट कर दिया।
- दिसंबर 2022 में, भारत की स्थापित RTS क्षमता 7.5 गीगावाट थी और 40 गीगावाट लक्ष्य की समय सीमा वर्ष 2026 तक बढ़ा दी गई थी।
- भारत की समग्र RTS क्षमता लगभग 796 गीगावाट है।
- वर्ष 2030 तक 280 गीगावाट सौर घटक के साथ 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए, अकेले RTS को वर्ष 2030 तक लगभग 100 गीगावाट का योगदान करने की आवश्यकता है।
राज्यों की स्थिति
- वर्ष 2024 में, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान की RTS क्षमताएं बड़ी छलांग लगा चुकी थीं, जबकि कुछ अन्य राज्य पीछे थे।
- राजस्थान में RTS की संभावनाएं देश में सबसे अधिक हैं। स्वीकृतियों को सरल बनाने, वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से RTS को बढ़ावा देने के इसके प्रयासों ने इस वृद्धि को बढ़ावा दिया है।
- हालाँकि, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सहित अन्य राज्यों को अभी भी अपनी RTS क्षमता का पूरी तरह से पता लगाना बाकी है।
- उनकी चुनौतियों में नौकरशाही बाधाएं, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक जागरूकता की कमी शामिल हैं।
'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना'
- यह एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य एक करोड़ घरों में RTS प्रणाली स्थापित करना तथा उन्हें हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना है।
- लक्षित घरों के लिए 2 किलोवाट के औसत सिस्टम आकार के परिणामस्वरूप कुल RTS क्षमता में 20 गीगावाट की वृद्धि होगी।
- यह योजना उन्नत सौर प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा भंडारण समाधानों और स्मार्ट ग्रिड अवसंरचना को अपनाने को भी प्रोत्साहित करती है।
RTS कैसे बढ़ सकता है?
- उपभोक्ताओं को अपने साथ जोड़ने के लिए जागरूकता पैदा करना महत्वपूर्ण है।
- इसके अतिरिक्त, RTS को परिवारों के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य होना चाहिए।
- यद्यपि सरकारी सब्सिडी से मदद मिल रही है, फिर भी अनेक कम लागत वाले वित्तपोषण विकल्पों की आवश्यकता है।
- हाल ही में RTS ऋण प्रदान करने वाले बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
- कम लागत वाले RTS ऋण तक पहुंच बाइक या कार ऋण प्राप्त करने जितनी आसान होनी चाहिए।
- सौर प्रौद्योगिकी, ऊर्जा भंडारण समाधान और स्मार्ट-ग्रिड बुनियादी ढांचे में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने से लागत कम हो सकती है, प्रदर्शन में सुधार हो सकता है और RTS प्रणालियों की विश्वसनीयता बढ़ सकती है।
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों (जैसे वर्ष 2015 में शुरू किया गया 'सूर्यमित्र' सौर पीवी तकनीशियन कार्यक्रम), व्यावसायिक पाठ्यक्रमों और कौशल विकास पहलों में निवेश से कुशल कार्यबल तैयार करने में मदद मिलेगी।
- जैसे-जैसे योजना का कार्यान्वयन जोरों पर होगा, नेट-मीटरिंग विनियमों, ग्रिड-एकीकरण मानकों और भवन संहिताओं की समीक्षा की जानी चाहिए और उन्हें अद्यतन किया जाना चाहिए

