भारत का पहला स्वदेशी ध्रुवीय अनुसंधान पोत
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| घटना | भारत अपना पहला स्वदेशी ध्रुवीय अनुसंधान पोत (PRV) बनाएगा |
| तिथि | 3 जून, 2025 |
| शामिल पक्ष | गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), भारत और Kongsberg, नॉर्वे |
| मुख्य उद्देश्य | ध्रुवीय अनुसंधान पोत (PRV) का स्वदेशी डिज़ाइन और निर्माण |
| PRV का उद्देश्य | गहरे समुद्र की खोज, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र अनुसंधान, ध्रुवीय बर्फ और जलवायु अध्ययन |
| मार्गदर्शक प्राधिकरण | राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR) |
| पृष्ठभूमि | भारत पहले ध्रुवीय अन्वेषण के लिए विदेशी जहाजों पर निर्भर था |
| घटना के मुख्य अंश | केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की उपस्थिति में MoU हस्ताक्षर समारोह |
| रणनीतिक पहलें | मेक इन इंडिया, महासागर विजन (क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए आपसी और समग्र उन्नति) (Make in India, MAHASAGAR Vision (Mutual & Holistic Advancement for Security Across Regions)) |
| अंतर्राष्ट्रीय सहभागिता | श्री सोनोवाल ने नॉर्वे में नोर-शिपिंग 2025 में भाग लिया |
| भारत-नॉर्वे सहयोग | नॉर्वेजियन शिपओनर्स एसोसिएशन (NSA) के साथ हरित शिप बिल्डिंग और निवेश पर गोलमेज सम्मेलन |
| PRV का महत्व | भारत के आर्कटिक और अंटार्कटिक पदचिह्न, जलवायु अनुसंधान और समुद्री जैव विविधता निगरानी को बढ़ावा देता है |
| भारत का योगदान | NSA के वैश्विक बेड़े में दूसरा सबसे बड़ा नाविक योगदानकर्ता, NSA के ऑर्डर बुक में 11% हिस्सेदारी |
| जहाज पुनर्चक्रण उद्योग | भारत में 87% एचकेसी-अनुपालक (HKC-compliant) जहाज पुनर्चक्रण यार्ड हैं |

