झारखंड में भारत का पहला भेड़िया अभ्यारण्य
| विषय | विवरण |
|---|---|
| अभयारण्य का नाम | महुआडांड़ भेड़िया अभयारण्य |
| स्थान | लातेहार जिला, झारखंड |
| महत्व | भारत का पहला और एकमात्र भेड़िया अभयारण्य |
| स्थानीय समुदाय | 80% सरना धर्म का पालन करने वाली जनजातियाँ, जो प्रकृति पूजा (वन, नदियाँ) करती हैं |
| सांस्कृतिक प्रभाव | साल वनों से मौसमी परहेज (नवंबर-फरवरी) भेड़िया प्रजनन/मांद बनाने के मौसम के साथ मेल खाता है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम होता है |
| मुख्य अध्ययन | नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स (2024) में प्रकाशित, भूभाग और सांस्कृतिक प्रथाओं से प्रभावित भेड़िया मांद चयन की जाँच करता है |
| भारतीय धूसर भेड़िया | उप-प्रजाति: कैनिस लुपस पैलिप्स; निशाचर, छोटे झुंड, कम मुखर |
| आवास | कंटीली झाड़ियाँ, घास के मैदान, अर्ध-शुष्क कृषि-पारिस्थितिक तंत्र |
| संरक्षण स्थिति | IUCN: संकटग्रस्त (भारत में 2,000-3,000); CITES App। I, WPA अनुसूची I |

