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भारत की हाइपरसोनिक तकनीक में सफलता: DRDL की बड़ी उपलब्धि

भारत की हाइपरसोनिक तकनीक में सफलता: DRDL की बड़ी उपलब्धि
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भारत की हाइपरसोनिक तकनीक में सफलता: DRDL की बड़ी उपलब्धि

पहलूविवरण
समाचार में क्यों?डीआरडीएल ने एक सक्रिय शीतल स्क्रैमजेट कम्बस्टर का 120 सेकंड का सफल ग्राउंड टेस्ट किया, जो भारत की हाइपरसोनिक मिसाइलों की दिशा में पहला कदम है।
हाइपरसोनिक मिसाइलें क्या हैं?उन्नत हथियार जो मच 5 (> 5,400 किमी/घंटा) से अधिक गति से यात्रा करते हैं, तेज और उच्च-प्रभाव वाले हमलों के लिए वायु रक्षा प्रणालियों से बचते हैं।
स्क्रैमजेट इंजन की भूमिकाएयर-ब्रीदिंग इंजन जो सुपरसोनिक गति पर दहन को बनाए रखते हैं, बिना किसी गतिमान भाग के, उच्च गति प्रवाह के दौरान हवा को संपीड़ित और प्रज्वलित करते हैं।
मुख्य उपलब्धियां- 1.5 किमी/सेकंड से अधिक हवा की गति पर सफल प्रज्वलन और स्थिर दहन। - नवीन लौ स्थिरीकरण तकनीक। - उन्नत कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स (सीएफडी) सिमुलेशन टूल।
स्वदेशी स्क्रैमजेट ईंधन- डीआरडीएल और भारतीय उद्योग द्वारा विकसित एंडोथर्मिक स्क्रैमजेट ईंधन। - तापीय प्रबंधन में सुधार और प्रज्वलन स्थिरता को बढ़ाता है।
थर्मल बैरियर कोटिंग (टीबीसी)- उन्नत सिरेमिक संरचना जो अत्यधिक तापमान को सहन करता है। - विशेष जमाव विधियों से इंजन प्रदर्शन और स्थायित्व में वृद्धि होती है।
रणनीतिक प्रभावभारत को स्थिर दहन, तापीय प्रबंधन और स्वदेशी ईंधन में उन्नति के साथ हाइपरसोनिक तकनीक में वैश्विक नेताओं की श्रेणी में स्थापित करता है।

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