सूर्य के कोरोना अध्ययन के लिए ISRO ESA के Proba-3 मिशन का प्रक्षेपण करेगा
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| मिशन का नाम | प्रोबा-3 |
| एजेंसी | यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और ISRO का सहयोग |
| प्रक्षेपण तिथि | 4 दिसंबर, 2024 |
| प्रक्षेपण यान | PSLV-XL |
| प्रक्षेपण स्थल | सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा, भारत |
| मिशन उद्देश्य | दो उपग्रहों के माध्यम से कृत्रिम सूर्य ग्रहण बनाकर सूर्य के कोरोना का अध्ययन |
| उपग्रह | ऑकल्टर अंतरिक्ष यान (200 किग्रा), कोरोनाग्राफ अंतरिक्ष यान (340 किग्रा) |
| कक्षा | अत्यधिक अण्डाकार कक्षा (600 x 60,530 किमी) जिसका कक्षीय काल 19.7 घंटे है |
| उपग्रहों के बीच की दूरी | 150 मीटर |
| अवलोकन समय | लगातार छह घंटे तक सूर्य के कोरोना का अवलोकन |
| उपकरण | ASPIICS (कोरोनाग्राफ), DARA (सौर रेडियोमीटर), 3DEES (इलेक्ट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर) |
| मिशन अवधि | दो वर्ष |
| सहयोगी देश | स्पेन, बेल्जियम, पोलैंड, इटली, स्विट्जरलैंड और भारत |
| पिछले ESA मिशन | प्रोबा-1 (2001), प्रोबा-2 (2009) |
| भारत को लाभ | मिशन डेटा तक विशेष पहुंच, ESA के साथ सौर अनुसंधान में सहयोग |

