मद्रास उच्च न्यायालय ने पंजीकरण अधिनियम की धारा 77-A को असंवैधानिक घोषित किया
| घटना | विवरण |
|---|---|
| मद्रास उच्च न्यायालय का निर्णय | पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 77-ए को असंवैधानिक घोषित किया। |
| धारा 77-ए की प्रकृति | 2022 में प्रस्तुत की गई, जिला पंजीयकों को धोखाधड़ी या जाली रिकॉर्ड के माध्यम से पंजीकृत संपत्ति दस्तावेजों को रद्द करने की अनुमति दी। |
| असंवैधानिकता के कारण | - जिला पंजीयकों को अत्यधिक अर्ध-न्यायिक शक्ति प्रदान करना।<br>- जिला पंजीयकों में न्यायिक विशेषज्ञता का अभाव।<br>- सरकार से जुड़े विवादों में पक्षपात की संभावना। |
| निर्णय के प्रभाव | - संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा।<br>- न्यायिक प्राथमिकता का रखरखाव। |
| मौजूदा प्रावधान | पंजीकरण अधिनियम की धारा 22-ए और 22-बी दस्तावेजों के पंजीकरण को अस्वीकार करने की अनुमति देती हैं। |
| ऐतिहासिक संदर्भ | संपत्ति विवाद पारंपरिक रूप से सिविल न्यायालयों द्वारा सुलझाए जाते थे, न कि जिला पंजीयकों द्वारा। |
| न्यायालय की मुख्य टिप्पणियाँ | - जिला पंजीयकों के निर्णयों में अंतिमता का अभाव।<br>- पंजीकरण अधिनियम का उद्देश्य सार्वजनिक रिकॉर्ड बनाए रखना है, संपत्ति के स्वामित्व का फैसला करना नहीं। |

