कोयला मंत्रालय द्वारा जारी खनन दिशानिर्देश 2024 में प्रमुख सुधार किए गए
- हाल के वर्षों में भारत में कोयला खनन में परिवर्तनकारी परिवर्तन हुए हैं, जिससे उद्योग जगत में महत्वपूर्ण विकास के साथ एक नए युग की शुरुआत हुई है।
- वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत से अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, वित्त वर्ष 23 के दौरान कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों ने सामूहिक रूप से 100 मिलियन टन कोयला उत्पादन को पार कर लिया है और वित्त वर्ष 26 तक 200 मिलियन टन को पार करने की संभावना है।
- इन घटनाक्रमों के जवाब में, कोयला मंत्रालय (MoC) ने खनन योजना की तैयारी के ढांचे को संशोधित किया है।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य संधारणीय(सतत) गतिविधिओं के माध्यम से कोयला संसाधन निष्कर्षण को अनुकूलित करना है, जिससे अपशिष्ट न्यूनतम हो तथा परिचालन दक्षता बढ़े।
- इस सामरिक दृष्टिकोण में परिचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए उन्नत तकनीकी एकीकरण शामिल है, जिससे पर्यावरणीय और आर्थिक स्थिरता प्राप्त हो सके।
प्रमुख सुधार प्रस्तुत किये गये
- निर्धारित लक्ष्यों से अधिक वार्षिक कोयला उत्पादन को समायोजित करने के लिए कैलेंडर योजना में लचीलेपन का प्रावधान।
- राज्य सरकारों को पट्टे पर दिए गए क्षेत्रों में पाए जाने वाले अन्य व्यावसायिक रूप से मूल्यवान खनिजों की अनिवार्य रिपोर्टिंग।
- कोयला खान विनियम, 2017 के अनुसार व्यापक सुरक्षा प्रबंधन योजनाओं का कार्यान्वयन, जिसमें अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट शामिल हैं।
- संबंधित पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करने के लिए फ्लाई ऐश भरने के प्रोटोकॉल का एकीकरण।
- खनन योजनाओं की व्यापक पंचवर्षीय अनुपालन रिपोर्ट के लिए ड्रोन सर्वेक्षण और संसाधित आउटपुट की आवश्यकता।
- कोयला भंडार के संरक्षण के लिए समीपवर्ती खदानों में अवरोधक कोयले के निष्कर्षण का प्रावधान।
- सुरक्षित और अधिक कुशल संचालन तथा ओवरबर्डन डम्पिंग के लिए खदान एकीकरण की सुविधा।
- वर्ष 2009 के बाद परित्यक्त या बंद की गई खदानों के लिए अस्थायी और अंतिम खदान बंद करने की योजना की अनिवार्य तैयारी।
- कोयला मंत्रालय भारत के कोयला खनन क्षेत्र में सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। ये व्यापक सुधार जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन, सामुदायिक कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए मंत्रालय के समर्पण को रेखांकित करते हैं।
प्रीलिम्स टेकअवे
- मुख्य खनिज
- खान एवं खनिज अधिनियम 1957

