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नैनो बबल तकनीक का दिल्ली चिड़ियाघर में परीक्षण

नैनो बबल तकनीक का दिल्ली चिड़ियाघर में परीक्षण
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नैनो बबल तकनीक का दिल्ली चिड़ियाघर में परीक्षण

समाचार में क्यों?मुख्य बिंदु
केन्द्रीय मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने दिल्ली चिड़ियाघर में तालाब के पानी को साफ़ और शुद्ध करने के लिए नैनो बबल टेक्नोलॉजी का 15-दिवसीय परीक्षण शुरू किया।- नैनो बबल टेक्नोलॉजी का उपयोग चिड़ियाघर के तालाब के पानी को साफ़ करने के लिए किया गया।<br>- यह परीक्षण केन्द्रीय मंत्री किर्ति वर्धन सिंह द्वारा शुरू किया गया।<br>- यह तकनीक चिड़ियाघर के तालाबों में जलीय जीवों के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए है।<br>- यह तकनीक पानी से शैवाल, दुर्गंध और रंग बिगड़ने की समस्या को दूर करती है।
केन्द्रीय मंत्री: किर्ति वर्धन सिंह- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री।
चिड़ियाघर का नाम: राष्ट्रीय प्राणि उद्यान, दिल्ली- दिल्ली, भारत में स्थित है।<br>- यहाँ विभिन्न जलीय प्रजातियाँ, जैसे घड़ियाल और मार्श मगरमच्छ, पाई जाती हैं।
तकनीक की अवधि: 15-दिवसीय परीक्षण- नैनो बबल टेक्नोलॉजी की प्रभावकारिता जाँचने के लिए परीक्षण अवधि।<br>- यदि सफल रहता है, तो इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।
चिड़ियाघर की जलीय प्रजातियाँ: घड़ियाल, मार्श मगरमच्छ- चिड़ियाघर के तालाबों में मौजूद हैं, जहाँ इस तकनीक का परीक्षण किया जा रहा है।
चिड़ियाघर के निदेशक: संजीत कुमार- राष्ट्रीय प्राणि उद्यान, दिल्ली के निदेशक।<br>- इस तकनीक के परीक्षण की निगरानी की।
तकनीक का उद्देश्य: जानवरों के स्वास्थ्य और दृश्यता के लिए पानी को साफ़ रखना।- पानी को शुद्ध करके शैवाल, दुर्गंध और गंदगी को रोकना।<br>- जल के अंदर जानवरों को देखने में आसानी बढ़ाना।

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