पी. गीता को नारीवादी साहित्य के लिए के. सरस्वती अम्मा पुरस्कार
| कार्यक्रम | विवरण |
|---|---|
| पुरस्कार का नाम | के. सरस्वती अम्मा पुरस्कार |
| प्रारंभ करने वाले | विंग्स (महिलाओं का एकीकरण और खेल के माध्यम से विकास) केरल |
| प्रथम प्राप्तकर्ता | पी. गीता, लेखिका, आलोचक और नारीवादी कार्यकर्ता |
| पुरस्कार का कारण | उनकी कृति आन् थचुकल (पुरुष रचनाएं), एम.टी. वासुदेवन नायर की पटकथाओं का विश्लेषण |
| पुरस्कार समारोह की तारीख | एक शनिवार को आयोजित (विशिष्ट तारीख नहीं बताई गई) |
| मुख्य वक्ता | सारा जोसेफ, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता |
| पुरस्कार का उद्देश्य | के. सरस्वती अम्मा के नारीवादी साहित्य में योगदान को सम्मानित करना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना |
| के. सरस्वती अम्मा के बारे में | नारीवादी साहित्य की अग्रणी; एक दर्जन से अधिक लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, एक नाटक और निबंधों का संग्रह लिखा; 1938 में साहित्यिक करियर शुरू किया |
| के. सरस्वती अम्मा की चुनौतियाँ | पुरुष विरोधी के रूप में चिह्नित किया गया, प्रस्तावनाओं के लिए लेखकों को खोजने में संघर्ष किया, पुरुष प्रधान साहित्यिक दुनिया में एकाकीपन का सामना किया |
| विंग्स की दृष्टि | सरस्वती अम्मा के पितृसत्तात्मक मानदंडों के विरुद्ध खड़े होने और साहसी, स्वतंत्र महिलाओं को बढ़ावा देने का सम्मान करना |
| पी. गीता का भाषण | नारीवादी साहित्य की चुनौतियों पर प्रकाश डाला, जिसमें सरस्वती अम्मा की कृतियों के संपादन और परिवर्तन शामिल हैं |
| नाट्य श्रद्धांजलि | सरस्वती अम्मा की कृतियों पर आधारित नाटक, श्रीजा अरंगोट्टुकरा और सी.एम. नारायणन द्वारा प्रस्तुत |

