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आधुनिक भारतीय कला के पिता: राजा रवि वर्मा

आधुनिक भारतीय कला के पिता: राजा रवि वर्मा
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आधुनिक भारतीय कला के पिता: राजा रवि वर्मा

श्रेणीविवरण
नामरजा रवि वर्मा
प्रसिद्ध नामआधुनिक भारतीय कला का पिता
जन्म तिथि और स्थान29 अप्रैल 1848; केरल, भारत
कला प्रशिक्षणयूरोपीय शिक्षकों के अधीन मुंबई में तेल चित्रकला सीखी (1866)
मुख्य योगदान- भारतीय कला में पश्चिमी तकनीकें (यथार्थवाद, परिप्रेक्ष्य, छायांकन) शामिल कीं
- भारत में तेल चित्रकला को लोकप्रिय बनाया
- भारतीय महाकाव्यों (रामायण, महाभारत) को सुलभ तरीके से चित्रित किया
- सस्ती लिथोग्राफिक प्रिंट के लिए रवि वर्मा प्रेस की स्थापना की
- भारतीय विषयों को यूरोपीय कला शैलियों के साथ मिलाया
प्रसिद्ध चित्र- शकुंतला पक्षियों को सुनती हुई (1870)
- भगवान श्री कृष्ण (1898)
- दमयंती और हंस (1899)
- तीरों के शय्या पर भीष्म (1895)
भारतीय कला पर प्रभाव- भारतीय कला का आधुनिकीकरण किया, जबकि पारंपरिक विषयों को बनाए रखा
- लिथोग्राफ के माध्यम से कला को आम लोगों के लिए सुलभ बनाया
- अबनिंद्रनाथ टैगोर जैसे भविष्य के कलाकारों को प्रेरित किया

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