बाजरे से चोकर हटाने से उन्हें खाने के लाभ कम हो जाते हैं: अध्ययन
- बाजरे से चोकर निकालने से उनमें प्रोटीन, आहार फाइबर, वसा, खनिज और फाइटेट की मात्रा कम हो जाती है जबकि कार्बोहाइड्रेट और एमाइलोज की मात्रा बढ़ जाती है, सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका नेचर स्प्रिंगर में हाल ही में प्रकाशित एक शोध में यह बात सामने आई है।
मुख्य बिन्दु :
- नेचर स्प्रिंगर पत्रिका में हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि बाजरे से चोकर निकालने से उनकी पोषण गुणवत्ता कम हो जाती है। शोध में उनके स्वास्थ्य लाभों को बनाए रखने के लिए साबुत अनाज वाले बाजरे का सेवन करने के महत्व पर जोर दिया गया है।
अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष:
- पोषक तत्वों की हानि: डीब्रानिंग से बाजरे में प्रोटीन, आहार फाइबर, वसा, खनिज और फाइटेट की मात्रा कम हो जाती है जबकि कार्बोहाइड्रेट और एमाइलोज की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे बाजरे के स्वास्थ्य लाभ कम हो जाते हैं।
- साबुत अनाज वाले बाजरे के लिए सिफ़ारिश: लेखक आहार की गुणवत्ता में सुधार के लिए भारतीय आहार में छिलके रहित (साबुत अनाज) बाजरे को बढ़ावा देने का सुझाव देते हैं, क्योंकि छिलके रहित बाजरा भोजन के ग्लाइसेमिक लोड को बढ़ा सकता है।
बाजरे के पोषण संबंधी लाभ:
- खनिजों की भरपूर मात्रा: बाजरे में कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे ज़रूरी खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं।
- स्वास्थ्य लाभ: बाजरे में फेनोलिक्स जैसे फ़ायदेमंद फाइटो-यौगिक होते हैं, जो एंटी-एजिंग, एंटीकैंसर, एंटी-एथेरोस्क्लेरोटिक, जीवाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण प्रदान करते हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय मान्यता: 2023 में, खाद्य और कृषि संगठन (FAO) ने भारतीय सरकार के मज़बूत समर्थन के साथ अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष मनाया।
साबुत और पॉलिश किए हुए बाजरे के बीच अंतर:
- बाजार के रुझान: 2018 में एक बाजार सर्वेक्षण में पाया गया कि सफ़ेद चावल के समान पॉलिश किए हुए बाजरे की बिक्री काफ़ी ज़्यादा हो रही थी, जिससे उपभोक्ताओं के लिए पैकेज्ड रूप में पॉलिश किए हुए और साबुत अनाज वाले बाजरे के बीच अंतर करना मुश्किल हो गया था।
- अध्ययन किये गये बाजरे के प्रकार: अनुसंधान में बाजरे की छोटी किस्मों पर ध्यान केन्द्रित किया गया, जिनमें फॉक्सटेल, लिटिल, कोदो, बार्नयार्ड और प्रोसो बाजरा शामिल हैं।
बाजरे को पॉलिश करने के कारण:
- शेल्फ लाइफ बढ़ाएँ: चोकर और अंकुर को हटाने से शेल्फ लाइफ बढ़ सकती है, क्योंकि चोकर में वसा की उच्च मात्रा के कारण यह जल्दी खराब हो सकता है।
- खाना पकाने की बेहतर विशेषताएँ: पॉलिश किए गए बाजरे जल्दी पकते हैं और नरम, कम चबाने वाले होते हैं।
स्वास्थ्य संबंधी निहितार्थ और सुझाव:
- ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर प्रभाव: मद्रास डायबिटीज़ रिसर्च फ़ाउंडेशन के वी. मोहन के अनुसार, पॉलिश किए गए बाजरे में ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है, जो मधुमेह रोगियों के लिए समस्याजनक हो सकता है।
- अनपॉलिश किए गए बाजरे की आवश्यकता: साबुत, अनपॉलिश किए गए बाजरे को अधिक सुलभ बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे मधुमेह रोगियों और व्यापक आबादी को लाभ होगा।
शेल्फ लाइफ़ के लिए प्रस्तावित समाधान:
- पैकेजिंग में प्रगति: डॉ. शोभना सुझाव देती हैं कि पैकेजिंग तकनीकें, जैसे वैक्यूम सीलिंग, साबुत अनाज की शेल्फ लाइफ़ बढ़ा सकती हैं, जिससे बिना ब्रैनिंग के उनके पोषण मूल्य को संरक्षित किया जा सकता है।
प्रीलिम्स टेकअवे
- मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन (एमडीआरएफ)
- खाद्य एवं कृषि संगठन

