भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023: मुख्य बदलाव और प्रभाव
| इवेंट | विवरण |
|---|---|
| नए अपराधिक कानून प्रभावी तिथि | 1 जुलाई, 2024 |
| कानून अधिनियमित | भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) |
| कानून निरस्त | भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम |
| संसदीय अनुमोदन | दिसंबर 2023 |
| प्रस्तावक | गृह मंत्री अमित शाह |
| नए कानूनों का फोकस | न्याय प्रदान करना, कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना, औपनिवेशिक-काल के कानूनों का प्रतिस्थापन |
| BSA की मुख्य विशेषताएं | - इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड (ईमेल, सर्वर लॉग, फाइल, स्थान डेटा, टेक्स्ट संदेश) को मान्यता<br>- मौखिक गवाही इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज की जा सकती है<br>- बलात्कार के मामलों में पीड़ित का बयान ऑडियो-वीडियो माध्यम से दर्ज किया जाएगा<br>- माध्यमिक सबूत को मौखिक और लिखित स्वीकारोक्ति तक विस्तारित किया गया |
| पुराने कानून से तुलना | - प्रस्तावना तिथि:पुराना: 1872, नया: 2023<br>- औपनिवेशिक प्रभाव:पुराना: ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन, नया: स्वतंत्रता के बाद के आधुनिक मूल्य<br>- भाषा:पुराना: पुरातन अंग्रेजी, नया: सरलीकृत और आधुनिक<br>- इलेक्ट्रॉनिक सबूत:पुराना: मूल प्रारूप, नया: व्यापक प्रावधान<br>- गवाही प्रक्रिया:पुराना: पारंपरिक प्रक्रिया, नया: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू<br>- दस्तावेज सबूत:पुराना: धारा 61-90, नया: इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज शामिल<br>- यौन अपराध सबूत:पुराना: सीमित पीड़ित अधिकार, नया: पीड़ित सुरक्षा बढ़ाई |

