जैव विविधता सम्मेलन (CBD) की समझ
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | जैविक विविधता पर सम्मेलन (Convention on Biological Diversity - CBD) |
| उद्देश्य | जैविक विविधता का संरक्षण, इसके घटकों का सतत उपयोग, और आनुवंशिक संसाधनों से होने वाले लाभों का न्यायसंगत और समान बंटवारा। |
| स्थापना वर्ष | 1992 |
| समर्थन करने वाले देशों की संख्या | 196 |
| मुख्य उद्देश्य | 1. जैविक विविधता का संरक्षण। <br>2. जैविक विविधता का सतत उपयोग। <br>3. लाभों का न्यायसंगत और समान बंटवारा। |
| शासी निकाय | पार्टियों का सम्मेलन (Conference of the Parties - COP) |
| सीओपी बैठक की आवृत्ति | हर दो साल में |
| सचिवालय मुख्यालय | मॉन्ट्रियल, कनाडा |
| सचिवालय की जिम्मेदारियां | 1. सीबीडी कार्यक्रमों को लागू करने में सरकारों की सहायता करना। <br>2. बैठकों का आयोजन और दस्तावेज़ तैयार करना। <br>3. अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ समन्वय करना। <br>4. जैविक विविधता से संबंधित जानकारी एकत्र करना और प्रसारित करना। |
| मुख्य प्रोटोकॉल | कार्टाजेना प्रोटोकॉल ऑन बायोसेफ्टी (जीवित संशोधित जीवों के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करता है)। |
| सतत विकास में भूमिका | 1. कृषि: सतत प्रथाओं को बढ़ावा देना। <br>2. जलवायु परिवर्तन: कार्बन सिंक के रूप में काम करने वाले पारिस्थितिकी तंत्रों की सुरक्षा। <br>3. सांस्कृतिक संरक्षण: स्वदेशी ज्ञान को मान्यता देना। <br>4. आर्थिक विकास: पर्यावरण-अनुकूल व्यावसायिक प्रथाओं को प्रोत्साहित करना। |

