उत्तराखंड सरकार 13 ग्लेशियल झीलों से उत्पन्न खतरे का अध्ययन करेगी
- मानसून के आगमन के साथ ही उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (USDMA) 13 ग्लेशियल झीलों का भेद्यता अध्ययन करेगा, जिनमें से पांच “उच्च जोखिम वाले क्षेत्र” में हैं।
मुख्य बिंदु:
- अध्ययन का उद्देश्य लेक ऑउटबर्स्ट जैसी आपदाओं से बचने में मदद के लिए डेटा उपलब्ध कराना है।
- हिमालय के ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के कारण खतरे में थे और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर जांच की आवश्यकता थी।
- दारमा, लासरयांघाटी और कुटियांगटी घाटी की झीलें
- धौली गंगा बेसिन की वसुधारा ताल झील उच्च जोखिम पैदा कर रही है।
- टीमें पांच संभावित उच्च जोखिम वाली झीलों का बैथिमेट्री अध्ययन शुरू करेंगी।
- अध्ययन से हमें झीलों के आकार, ग्लेशियरों के निर्माण, उनके पिघलने आदि के बारे में सही और सटीक जानकारी मिलेगी।
- USDMA ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस से पांच उच्च जोखिम वाली हिमनद झीलों की स्थिति पर एक रिपोर्ट साझा करने को कहा।
दो विशेषज्ञ दल
- राज्य सरकार ने इन हिमनद झीलों से जुड़े खतरों का आकलन करने के लिए दो विशेषज्ञ दल गठित किए।
- पिछले दशक में उत्तराखंड में दो बड़ी ग्लेशियल झीलों के ऑउटबर्स्ट हो जाने से बाढ़ आई।
- पहली आपदा जून 2013 में केदारनाथ घाटी में हुई थी, जिसके कारण 6,000 लोगों की मृत्यु हुई थी।
- दूसरी घटना फरवरी 2021 में चमोली में ऋषि गंगा घाटी में हुई थी, जिसमें 72 लोगों की जान चली गई थी।
प्रीलिम्स टेकअवे:
- ग्लेशियल झील
- गंगा अपवाह बेसिन

