अरुणाचल प्रदेश में अपर सियांग जलविद्युत परियोजना का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध क्यों
- केंद्रीय ऊर्जा मंत्री के राज्य दौरे से पहले अरुणाचल प्रदेश के दो बांध विरोधी कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में ले लिया गया
मुख्य बिंदु:
- भारत सरकार ब्रह्मपुत्र की एक प्रमुख सहायक नदी सियांग पर एक विशाल बांध परियोजना की योजना बना रही है।
- नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन के नेतृत्व में इस ऊपरी सियांग बहुउद्देशीय भंडारण परियोजना का लक्ष्य भारी मात्रा में बिजली (11,000 मेगावाट) उत्पन्न करना है, लेकिन इसमें कई चुनौतियां हैं।
- विस्थापित समुदाय: बांध से गांवों में बाढ़ आ सकती है और आदि जनजाति के 100,000 से अधिक सदस्यों को स्थानांतरित होने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे उनकी जीवन शैली और पारंपरिक भूमि प्रभावित होगी।
- पर्यावरणीय चिंताएँ: विशेषज्ञों को चिंता है कि यह परियोजना क्षेत्र की पारिस्थितिकी को बाधित कर सकती है, विशेष रूप से भूकंप के प्रति क्षेत्र की संवेदनशीलता और बदतर बाढ़ की संभावना को देखते हुए।
- अनुमोदन संबंधी चिंताएँ: वन कानूनों में हाल के बदलावों ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं कि पर्यावरणीय मंजूरी में जल्दबाजी की जा सकती है, जिससे स्थानीय समुदायों और पर्यावरण समूहों का कड़ा विरोध हो सकता है।
प्रीलिम्स टेकअवे
- 2023 का वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम (एफसीएए)।

