| कार्यक्रम | विश्व रंगमंच दिवस |
| तिथि | 27 मार्च (प्रतिवर्ष) |
| शुरुआत | इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट (ITI) द्वारा 1961 में |
| पहली बार मनाया गया | 1962 |
| 2025 की थीम | "रंगमंच और शांति की संस्कृति" |
| उद्देश्य | रंगमंच के महत्व को मान्यता देना, शांति, समझ, और सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देना। |
| मुख्य गतिविधियाँ | 90+ ITI केंद्रों द्वारा आयोजित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच कार्यक्रम। |
| ऐतिहासिक महत्व | "थिएटर ऑफ नेशंस" के मौसम की शुरुआत, पेरिस में। |
| भारतीय रंगमंच का इतिहास | वैदिक काल से शुरू, नाट्य शास्त्र मूलभूत पाठ। |
| भारतीय रंगमंच का विकास | - वैदिक काल: ऋग्वेद के मंत्र संवाद के रूप में। <br> - संस्कृत रंगमंच: भास, कालिदास। <br> - लोक रंगमंच: जात्रा, नौटंकी, यक्षगान। <br> - सड़क रंगमंच: सामाजिक जागरूकता। <br> - ब्रिटिश प्रभाव: यथार्थवाद की शुरुआत। <br> - स्वतंत्रता के बाद: 1943 में इप्टा (IPTA) का गठन। |
| प्रसिद्ध रंगमंच अकादमियाँ | - राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD), दिल्ली <br> - फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे <br> - सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता <br> - एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म & टेलीविजन (AAFT), नोएडा |
| प्रतिष्ठित हस्तियाँ | - इब्राहिम अल्काज़ी: "भारतीय रंगमंच के पिता" <br> - उत्पल दत्त: क्रांतिकारी नाटककार <br> - रवींद्रनाथ टैगोर: भारतीय-पश्चिमी नाटकों का समन्वय <br> - गिरीश कार्नाड: आधुनिक नाटक लेखन के अग्रणी <br> - पृथ्वीराज कपूर: पृथ्वी थिएटर के संस्थापक <br> - बी. जयश्री, खालेद चौधरी, मकरंद देशपांडे: प्रमुख योगदानकर्ता |
| रंगमंच पृष्ठभूमि वाले अभिनेता | अनुपम खेर, ओम पुरी, शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह, परेश रावल, राजकुमार राव, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, इरफान खान, मनोज बाजपेई |