म्यांमार पर एक प्रगतिशील भारतीय नीति की रूपरेखा
तीन साल बाद भी म्यांमार की सेना, जिसने फरवरी 2021 में निर्वाचित नागरिक सरकार को उखाड़ फेंका था, अपने ही लोगों की हत्या, उन्हें अपंग बनाना और उन्हें विस्थापित करना जारी रखे हुए है। भारत ने इस शासन के साथ औपचारिक संबंध बनाए रखे हैं, जिसने अब तक 5,000 से अधिक लोगों की हत्या की है और लगभग 2.5 मिलियन लोगों को विस्थापित किया है।
मुख्य बिंदु
- एक प्रमुख लोकतंत्र के रूप में भारत को म्यांमार में लोकतंत्र और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए अपनी स्थिति का लाभ उठाना चाहिए।
- उनका तर्क है कि यह दृष्टिकोण भारत के दीर्घकालिक लक्ष्यों के साथ बेहतर तालमेल रखता है तथा इसकी क्षेत्रीय स्थिति को मजबूत करता है।
परिवर्तन हेतु सिफ़ारिशें:
- लोकतंत्र का समर्थन : भारत म्यांमार के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन की सहायता के लिए अपने लोकतांत्रिक अनुभव का उपयोग कर सकता है।
- इसमें राष्ट्रीय एकता सरकार और अन्य प्रतिरोध समूहों को प्रशिक्षण और ज्ञान साझा करना शामिल हो सकता है।
- सैन्य सहायता समाप्त करना : भारत को तुरंत ही सैनिक शासकों को हथियार बेचना तथा सैन्य सहायता देना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि इन संसाधनों का उपयोग नागरिकों को दबाने के लिए किया जाता है।
- मानवीय सहायता: भारत म्यांमार में संघर्ष प्रभावित नागरिकों को सहायता पहुंचाने के लिए सीमा पार मानवीय गलियारे स्थापित कर सकता है। इसमें फ्री मूवमेंट रेजीम (FMR) को पुनर्जीवित करना और स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों के साथ काम करना शामिल हो सकता है।
- शरणार्थियों की सुरक्षा: भारत को म्यांमार से भाग रहे शरणार्थियों को हिरासत में लेना और निर्वासित करना बंद करना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांत यह तय करते हैं कि उन्हें अवैध अप्रवासी नहीं बल्कि सुरक्षा चाहने वाले शरणार्थी के रूप में माना जाना चाहिए।
- समावेशी शरणार्थी नीतियों को बढ़ावा देना : सरकार को अन्य देशों में अपनाई गई सर्वोत्तम गतिविधिओं को अपनाते हुए तथा अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए शरणार्थियों के लिए मानवीय व्यवहार और आश्रय सुनिश्चित करना चाहिए।
- अधिक मूल्य-संचालित दृष्टिकोण अपनाकर भारत अपने सामरिक हितों को लोकतंत्र और मानवाधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ बेहतर ढंग से संतुलित कर सकता है।
प्रीलिम्स टेकअवे
- मानचित्र आधारित प्रश्न

