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ISRO का भविष्य: वी. नारायणन के नेतृत्व में भारत की अंतरिक्ष योजनाएं

ISRO का भविष्य: वी. नारायणन के नेतृत्व में भारत की अंतरिक्ष योजनाएं
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ISRO का भविष्य: वी. नारायणन के नेतृत्व में भारत की अंतरिक्ष योजनाएं

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चर्चा में क्यों?इसरो के नवनियुक्त अध्यक्ष वी नारायणन ने भारत के भविष्य के अंतरिक्ष रोडमैप को साझा किया, जिसमें गगनयान, चंद्रयान-4, अंतरग्रहीय मिशन और अंतरिक्ष स्टेशन का विकास शामिल है।
मुख्य मिशन- गगनयान मिशन (2026): 400 किमी लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन। - चंद्रयान-4 (2027): 9,200 किग्रा का उपग्रह जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को लक्षित करेगा और नमूना संग्रह एवं प्रयोग करेगा।
प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी में उन्नतिइसरो का नया जनरेशन प्रक्षेपण यान 30,000 किग्रा को LEO तक ले जा सकता है, जो SLV 3 की तुलना में पेलोड क्षमता में 1,000 गुना वृद्धि दर्शाता है। यान में पुन: प्रयोज्यता होगी जिसमें पहले चरण को वापस लाया जा सकेगा।
स्पेडेक्स मिशनइसरो ने जनवरी 2025 में LEO में उपग्रह डॉकिंग हासिल की और ऐसा करने वाला चौथा देश बन गया। इस सफलता ने 2028 तक पांच-मॉड्यूल अंतरिक्ष स्टेशन का मार्ग प्रशस्त किया।
भारत की उपग्रह बुनियाद ढांचाभारत के पास कक्षा में 131 उपग्रह हैं, जिनमें से 56 दूरसंचार और सीमा निगरानी जैसी राष्ट्रीय आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं। इसरो उपग्रह विकास के लिए निजी कंपनियों के साथ सहयोग कर रहा है।
नाविक प्रणालीनाविक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली के दूसरे चरण में पांच और उपग्रह तैनात किए जाएंगे, जिससे भारत की वैश्विक नेविगेशन क्षमता में वृद्धि होगी।
अंतरिक्ष स्थिरताइसरो अंतरिक्ष कचरे से निपटने के लिए स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस (SSA) कार्यक्रम चला रहा है, जिसमें टकराव से बचने के लिए उपग्रहों को पुन: स्थिति देना और ईंधन भरना जैसी रणनीतियां शामिल हैं।
आगामी विज्ञान मिशन- शुक्र और मंगल मिशन: शुक्र की सतह और मंगल की भूविज्ञान पर अंतरग्रहीय शोध। - चंद्र ध्रुव अन्वेषण मिशन (LUPEX) (जाक्सा के साथ): 250 किग्रा के रोवर वाला मिशन, जो चंद्र अन्वेषण को बढ़ाएगा।
सौर मिशन: आदित्य-L1आदित्य-L1 ने सूर्य के व्यवहार पर महत्वपूर्ण डेटा प्रदान किया है, जो भविष्य के सौर शोध का आधार तैयार करेगा।
अगले दशक के लिए इसरो की दृष्टि- गगनयान, चंद्रयान-4, नया जनरेशन प्रक्षेपण यान और अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण पर ध्यान। - सैटेलाइट बुनियादी ढांचा जो संचार, नेविगेशन और आपदा प्रबंधन को समर्थन देगा।

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